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नोएडा में ऑनलाइन निवेश के नाम पर आर्किटेक्ट से 12 करोड़ रुपए की साइबर ठगी। जानें पूरा मामला, पुलिस ??

नोएडा में ऑनलाइन निवेश के नाम पर आर्किटेक्ट से 12 करोड़ रुपए की साइबर ठगी। जानें पूरा मामला, पुलिस ??
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प्रतीकात्मक तस्वीर (Representative Image/AI Generated)"

🟦 The Global News Desk

 नोएडा में हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी का बड़ा खुलासा – निवेश के नाम पर आर्किटेक्ट से 12 करोड़ रुपये उड़ाए गए

 

ऑनलाइन निवेश योजना बनी सबसे बड़ा जाल

नोएडा में साइबर अपराध का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां डिजिटल निवेश और भारी मुनाफे का लालच देकर एक आर्किटेक्ट से लगभग ₹12 करोड़ की ठगी की गई। यह घटना नोएडा में हुई अब तक की सबसे बड़ी व्यक्तिगत ऑनलाइन फ्रॉड वारदात मानी जा रही है। ठगों ने पहले भरोसा बनाकर छोटे मुनाफे दिखाए और फिर करोड़ों रुपये निवेश करवाकर रकम गायब कर दी।

 

कैसे शुरू हुआ यह साइबर फ्रॉड?

 भरोसा बनाने की चाल

पीड़ित को सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफार्म से निवेश का ऑफर मिला।

ठगों ने खुद को विदेशी ट्रेडिंग और स्टॉक मार्केट विशेषज्ञ बताया।

शुरुआती निवेश पर मुनाफे के नकली स्क्रीनशॉट भेजे गए।

पीड़ित को एक फर्जी ट्रेडिंग एप और व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया।

ग्रुप में कई फर्जी निवेशकों ने बड़ी कमाई दिखाकर भरोसा बनाया।

 

कैसे लूटा गया 12 करोड़ रुपये

 धीरे-धीरे रकम निकलवाई गई

9 बड़े ट्रांजेक्शनों के जरिए लगभग ₹11.99 करोड़ ट्रांसफर कराए गए।

विदड्रॉल के समय “टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और अकाउंट अपग्रेड” के नाम पर अतिरिक्त पैसे मांगे गए।

बाद में लगभग ₹17 करोड़ और जमा करने का दबाव बनाया गया।

मना करने पर पीड़ित को ग्रुप और ऐप दोनों से ब्लॉक कर दिया गया।

 

पुलिस जांच और कार्रवाई

ठगों की डिजिटल ट्रैकिंग जारी

पीड़ित ने साइबर क्राइम थाना, नोएडा में FIR दर्ज करवाई।

बैंक खातों की जांच करके धन रोकने की प्रक्रिया चल रही है।

पुलिस मोबाइल नंबर, IP एड्रेस और नकली ऐप के नेटवर्क की खोज कर रही है।

जांच में इंटरनेशनल साइबर गैंग की आशंका जताई गई।

 

इस केस से क्या सीख मिलती है

लालच और भरोसा दोनों साइबर अपराधियों का मुख्य हथियार होते हैं।

आज ठग प्रोफेशनल सेटअप, टीम, कस्टमर सर्विस और फर्जी निवेश परिणाम तैयार रखते हैं।

डिजिटल ठगी अब संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत हो चुकी है।

 

कैसे बचें ऐसे निवेश फ्रॉड से

जरूरी सावधानियां

सिर्फ SEBI-registered प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करें।

सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर मिले ऑफर से सावधान रहें।

जल्दी मुनाफा और गारंटीड रिटर्न हमेशा धोखा होता है।

बैंक / OTP / UPI / KYC जानकारी किसी को न दें।

फ्रॉड होते ही तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें।

 

धोखाधड़ी होने पर क्या करें

cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

ट्रांजेक्शन ID, बैंक स्टेटमेंट, स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।

बैंक को तुरंत फंड ब्लॉक रिक्वेस्ट दें।

पुलिस जांच में पूरी डिजिटल जानकारी उपलब्ध कराएं।

 

10 FAQs with Answers

Q1: यह ठगी किस तरीके से की गई?

A: फेक ट्रेडिंग ऐप और व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से निवेश का भरोसा बनाकर।

Q2: पीड़ित को कैसे फंसाया गया?

A: नकली कमाई दिखाकर और फर्जी निवेशकों के मैसेज से भ्रम पैदा करके।

Q3: क्या पैसा वापस मिल सकता है?

A: जांच जारी है, बैंक खाते फ्रीज़ होने पर कुछ राशि वापस मिल सकती है।

Q4: क्या अपराधी पकड़े गए हैं?

A: जांच जारी है, पुलिस डिजिटल ट्रैकिंग कर रही है।

Q5: क्या ऑनलाइन निवेश सुरक्षित है?

A: हां, लेकिन केवल SEBI-रजिस्टर्ड कंपनियों में।

Q6: फर्जी ट्रेडिंग ऐप की पहचान कैसे करें?

A: Play Store / App Store रिव्यू, वेबसाइट वैधता, SEBI रजिस्टर्ड स्थिति जांचें।

Q7: फ्रॉड होने पर पहला कदम क्या हो?

A: तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें और ब्लॉक रिक्वेस्ट डालें।

Q8: क्या बैंक नुक़सान की भरपाई करता है?

A: बैंक तभी जिम्मेदार होता है जब सुरक्षा खामियों का दोष बैंक पर हो।

Q9: क्या ये अपराध सिर्फ भारत में होते हैं?

A: नहीं, कई ऐसे मामले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क द्वारा भी किए जाते हैं।

Q10: आम लोग खुद को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं?

A: जागरूक रहें, जल्दी मुनाफा वाले ऑफर को तुरंत अस्वीकार करें।

 

Disclaimer

यह लेख सिर्फ जागरूकता और सूचना के उद्देश्य से लिखा गया है। यहां दी जानकारी सार्वजनिक स्रोतों और उपलब्ध डेटा पर आधारित है। किसी भी व्यक्ति, संस्था या प्लेटफॉर्म पर आरोप सिद्ध नहीं हैं। निवेश का निर्णय स्वयं जांच-परख करने के बाद ही लें।
 

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🟦 The Global News Desk

 नोएडा में हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी का बड़ा खुलासा – निवेश के नाम पर आर्किटेक्ट से 12 करोड़ रुपये उड़ाए गए

 

ऑनलाइन निवेश योजना बनी सबसे बड़ा जाल

नोएडा में साइबर अपराध का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां डिजिटल निवेश और भारी मुनाफे का लालच देकर एक आर्किटेक्ट से लगभग ₹12 करोड़ की ठगी की गई। यह घटना नोएडा में हुई अब तक की सबसे बड़ी व्यक्तिगत ऑनलाइन फ्रॉड वारदात मानी जा रही है। ठगों ने पहले भरोसा बनाकर छोटे मुनाफे दिखाए और फिर करोड़ों रुपये निवेश करवाकर रकम गायब कर दी।

 

कैसे शुरू हुआ यह साइबर फ्रॉड?

 भरोसा बनाने की चाल

पीड़ित को सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफार्म से निवेश का ऑफर मिला।

ठगों ने खुद को विदेशी ट्रेडिंग और स्टॉक मार्केट विशेषज्ञ बताया।

शुरुआती निवेश पर मुनाफे के नकली स्क्रीनशॉट भेजे गए।

पीड़ित को एक फर्जी ट्रेडिंग एप और व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया।

ग्रुप में कई फर्जी निवेशकों ने बड़ी कमाई दिखाकर भरोसा बनाया।

 

कैसे लूटा गया 12 करोड़ रुपये

 धीरे-धीरे रकम निकलवाई गई

9 बड़े ट्रांजेक्शनों के जरिए लगभग ₹11.99 करोड़ ट्रांसफर कराए गए।

विदड्रॉल के समय “टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और अकाउंट अपग्रेड” के नाम पर अतिरिक्त पैसे मांगे गए।

बाद में लगभग ₹17 करोड़ और जमा करने का दबाव बनाया गया।

मना करने पर पीड़ित को ग्रुप और ऐप दोनों से ब्लॉक कर दिया गया।

 

पुलिस जांच और कार्रवाई

ठगों की डिजिटल ट्रैकिंग जारी

पीड़ित ने साइबर क्राइम थाना, नोएडा में FIR दर्ज करवाई।

बैंक खातों की जांच करके धन रोकने की प्रक्रिया चल रही है।

पुलिस मोबाइल नंबर, IP एड्रेस और नकली ऐप के नेटवर्क की खोज कर रही है।

जांच में इंटरनेशनल साइबर गैंग की आशंका जताई गई।

 

इस केस से क्या सीख मिलती है

लालच और भरोसा दोनों साइबर अपराधियों का मुख्य हथियार होते हैं।

आज ठग प्रोफेशनल सेटअप, टीम, कस्टमर सर्विस और फर्जी निवेश परिणाम तैयार रखते हैं।

डिजिटल ठगी अब संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत हो चुकी है।

 

कैसे बचें ऐसे निवेश फ्रॉड से

जरूरी सावधानियां

सिर्फ SEBI-registered प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करें।

सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर मिले ऑफर से सावधान रहें।

जल्दी मुनाफा और गारंटीड रिटर्न हमेशा धोखा होता है।

बैंक / OTP / UPI / KYC जानकारी किसी को न दें।

फ्रॉड होते ही तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें।

 

धोखाधड़ी होने पर क्या करें

cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

ट्रांजेक्शन ID, बैंक स्टेटमेंट, स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।

बैंक को तुरंत फंड ब्लॉक रिक्वेस्ट दें।

पुलिस जांच में पूरी डिजिटल जानकारी उपलब्ध कराएं।

 

10 FAQs with Answers

Q1: यह ठगी किस तरीके से की गई?

A: फेक ट्रेडिंग ऐप और व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से निवेश का भरोसा बनाकर।

Q2: पीड़ित को कैसे फंसाया गया?

A: नकली कमाई दिखाकर और फर्जी निवेशकों के मैसेज से भ्रम पैदा करके।

Q3: क्या पैसा वापस मिल सकता है?

A: जांच जारी है, बैंक खाते फ्रीज़ होने पर कुछ राशि वापस मिल सकती है।

Q4: क्या अपराधी पकड़े गए हैं?

A: जांच जारी है, पुलिस डिजिटल ट्रैकिंग कर रही है।

Q5: क्या ऑनलाइन निवेश सुरक्षित है?

A: हां, लेकिन केवल SEBI-रजिस्टर्ड कंपनियों में।

Q6: फर्जी ट्रेडिंग ऐप की पहचान कैसे करें?

A: Play Store / App Store रिव्यू, वेबसाइट वैधता, SEBI रजिस्टर्ड स्थिति जांचें।

Q7: फ्रॉड होने पर पहला कदम क्या हो?

A: तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें और ब्लॉक रिक्वेस्ट डालें।

Q8: क्या बैंक नुक़सान की भरपाई करता है?

A: बैंक तभी जिम्मेदार होता है जब सुरक्षा खामियों का दोष बैंक पर हो।

Q9: क्या ये अपराध सिर्फ भारत में होते हैं?

A: नहीं, कई ऐसे मामले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क द्वारा भी किए जाते हैं।

Q10: आम लोग खुद को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं?

A: जागरूक रहें, जल्दी मुनाफा वाले ऑफर को तुरंत अस्वीकार करें।

 

Disclaimer

यह लेख सिर्फ जागरूकता और सूचना के उद्देश्य से लिखा गया है। यहां दी जानकारी सार्वजनिक स्रोतों और उपलब्ध डेटा पर आधारित है। किसी भी व्यक्ति, संस्था या प्लेटफॉर्म पर आरोप सिद्ध नहीं हैं। निवेश का निर्णय स्वयं जांच-परख करने के बाद ही लें।
 

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🟦 The Global News Desk

 नोएडा में हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी का बड़ा खुलासा – निवेश के नाम पर आर्किटेक्ट से 12 करोड़ रुपये उड़ाए गए

 

ऑनलाइन निवेश योजना बनी सबसे बड़ा जाल

नोएडा में साइबर अपराध का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां डिजिटल निवेश और भारी मुनाफे का लालच देकर एक आर्किटेक्ट से लगभग ₹12 करोड़ की ठगी की गई। यह घटना नोएडा में हुई अब तक की सबसे बड़ी व्यक्तिगत ऑनलाइन फ्रॉड वारदात मानी जा रही है। ठगों ने पहले भरोसा बनाकर छोटे मुनाफे दिखाए और फिर करोड़ों रुपये निवेश करवाकर रकम गायब कर दी।

 

कैसे शुरू हुआ यह साइबर फ्रॉड?

 भरोसा बनाने की चाल

पीड़ित को सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफार्म से निवेश का ऑफर मिला।

ठगों ने खुद को विदेशी ट्रेडिंग और स्टॉक मार्केट विशेषज्ञ बताया।

शुरुआती निवेश पर मुनाफे के नकली स्क्रीनशॉट भेजे गए।

पीड़ित को एक फर्जी ट्रेडिंग एप और व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया।

ग्रुप में कई फर्जी निवेशकों ने बड़ी कमाई दिखाकर भरोसा बनाया।

 

कैसे लूटा गया 12 करोड़ रुपये

 धीरे-धीरे रकम निकलवाई गई

9 बड़े ट्रांजेक्शनों के जरिए लगभग ₹11.99 करोड़ ट्रांसफर कराए गए।

विदड्रॉल के समय “टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और अकाउंट अपग्रेड” के नाम पर अतिरिक्त पैसे मांगे गए।

बाद में लगभग ₹17 करोड़ और जमा करने का दबाव बनाया गया।

मना करने पर पीड़ित को ग्रुप और ऐप दोनों से ब्लॉक कर दिया गया।

 

पुलिस जांच और कार्रवाई

ठगों की डिजिटल ट्रैकिंग जारी

पीड़ित ने साइबर क्राइम थाना, नोएडा में FIR दर्ज करवाई।

बैंक खातों की जांच करके धन रोकने की प्रक्रिया चल रही है।

पुलिस मोबाइल नंबर, IP एड्रेस और नकली ऐप के नेटवर्क की खोज कर रही है।

जांच में इंटरनेशनल साइबर गैंग की आशंका जताई गई।

 

इस केस से क्या सीख मिलती है

लालच और भरोसा दोनों साइबर अपराधियों का मुख्य हथियार होते हैं।

आज ठग प्रोफेशनल सेटअप, टीम, कस्टमर सर्विस और फर्जी निवेश परिणाम तैयार रखते हैं।

डिजिटल ठगी अब संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत हो चुकी है।

 

कैसे बचें ऐसे निवेश फ्रॉड से

जरूरी सावधानियां

सिर्फ SEBI-registered प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करें।

सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर मिले ऑफर से सावधान रहें।

जल्दी मुनाफा और गारंटीड रिटर्न हमेशा धोखा होता है।

बैंक / OTP / UPI / KYC जानकारी किसी को न दें।

फ्रॉड होते ही तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें।

 

धोखाधड़ी होने पर क्या करें

cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

ट्रांजेक्शन ID, बैंक स्टेटमेंट, स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।

बैंक को तुरंत फंड ब्लॉक रिक्वेस्ट दें।

पुलिस जांच में पूरी डिजिटल जानकारी उपलब्ध कराएं।

 

10 FAQs with Answers

Q1: यह ठगी किस तरीके से की गई?

A: फेक ट्रेडिंग ऐप और व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से निवेश का भरोसा बनाकर।

Q2: पीड़ित को कैसे फंसाया गया?

A: नकली कमाई दिखाकर और फर्जी निवेशकों के मैसेज से भ्रम पैदा करके।

Q3: क्या पैसा वापस मिल सकता है?

A: जांच जारी है, बैंक खाते फ्रीज़ होने पर कुछ राशि वापस मिल सकती है।

Q4: क्या अपराधी पकड़े गए हैं?

A: जांच जारी है, पुलिस डिजिटल ट्रैकिंग कर रही है।

Q5: क्या ऑनलाइन निवेश सुरक्षित है?

A: हां, लेकिन केवल SEBI-रजिस्टर्ड कंपनियों में।

Q6: फर्जी ट्रेडिंग ऐप की पहचान कैसे करें?

A: Play Store / App Store रिव्यू, वेबसाइट वैधता, SEBI रजिस्टर्ड स्थिति जांचें।

Q7: फ्रॉड होने पर पहला कदम क्या हो?

A: तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें और ब्लॉक रिक्वेस्ट डालें।

Q8: क्या बैंक नुक़सान की भरपाई करता है?

A: बैंक तभी जिम्मेदार होता है जब सुरक्षा खामियों का दोष बैंक पर हो।

Q9: क्या ये अपराध सिर्फ भारत में होते हैं?

A: नहीं, कई ऐसे मामले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क द्वारा भी किए जाते हैं।

Q10: आम लोग खुद को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं?

A: जागरूक रहें, जल्दी मुनाफा वाले ऑफर को तुरंत अस्वीकार करें।

 

Disclaimer

यह लेख सिर्फ जागरूकता और सूचना के उद्देश्य से लिखा गया है। यहां दी जानकारी सार्वजनिक स्रोतों और उपलब्ध डेटा पर आधारित है। किसी भी व्यक्ति, संस्था या प्लेटफॉर्म पर आरोप सिद्ध नहीं हैं। निवेश का निर्णय स्वयं जांच-परख करने के बाद ही लें।