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Hapur Fake Death Scam: ₹50 Lakh Insurance Fraud Using Dummy Dead Body | Identity Theft Exposed

Hapur Fake Death Scam: ₹50 Lakh Insurance Fraud Using Dummy Dead Body | Identity Theft Exposed
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Representative Image: This image is used only for illustration. It does not depict the actual incident, any real person, or any real deceased individual.

 

📰 Hapur Dummy Dead Body Scam: 50 लाख के बीमा क्लेम की सनसनीखेज साजिश उजागर

The Global Vission News Desk

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के ब्रिजघाट श्मशान घाट में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब अंतिम संस्कार के लिए लाया गया “शव” असल में प्लास्टिक का डमी पुतला निकला।

 यह कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी लग सकती है, लेकिन यह घटना वास्तविक है — और इसमें 50 लाख के बीमा क्लेम की ठगी छिपी थी।

चार युवकों ने मिलकर एक जीवित व्यक्ति को “मृत” दिखाने की योजना बनाई थी। लेकिन श्मशान कर्मचारियों की चौकसी ने इस घोटाले को उसी समय खत्म कर दिया।

यह मामला आधुनिक भारत में बढ़ते identity theft, डिजिटल फर्जीवाड़े और बीमा धोखाधड़ी की जटिलता को उजागर करता है।

हापुड़ ब्रिजघाट श्मशान घाट में नकली शव का उपयोग कर 50 लाख रुपये का बीमा क्लेम लेने की कोशिश पकड़ी गई। मास्टरमाइंड कमल सोमानी, पहचान चोरी के शिकार अंशुल कुमार, पुलिस जांच और पूरा केस यहाँ पढ़ें — ।


🔍 पूरी कहानी — घटना कैसे शुरू हुई?

गुरुवार शाम करीब 4 बजे एक सफेद i20 कार में चार युवक ब्रिजघाट श्मशान घाट पहुँचते हैं। उनकी हड़बड़ाहट, असामान्य व्यवहार, कफन की बनावट और “शव” का वजन देखकर कर्मचारियों को पहले ही शक हो गया था।

शव को उतारते समय:

🔴 कोई परिजन मौजूद नहीं था
🔵 मृतक का नाम-पता स्पष्ट नहीं बताया गया
🟡 मेडिकल रिपोर्ट नई छपी हुई लग रही थी
🟢 शव का वजन और शेप मानव जैसा नहीं था

जब कर्मचारियों ने कफन उठाने की ज़िद की —
नीचे से प्लास्टिक का डमी बॉडी निकल आया।

पूरे श्मशान पर खामोशी छा गई। कर्मचारियों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।


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👤 मास्टरमाइंड: कमल सोमानी का कर्ज और लालच

कमल सोमानी लंबे समय से कर्ज में डूबा था। Internet और fake insurance racket के ज़रिए उसने यह तरीका खोजा कि कैसे बीमा कंपनियों से बड़ी रकम निकाली जा सके।

उसने एक ऐसी पहचान चुनी जो उसके हाथ आसानी से लग सकती थी:

🔵 अंशुल कुमार — एक निर्दोष युवक, जिसे पता भी नहीं था कि उसकी पहचान का दुरुपयोग हो चुका है।


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👤 पीड़ित: Identity Theft का शिकार अंशुल कुमार

अंशुल के:

🟢 Aadhaar
🟡 PAN
🔵 Mobile-linked identity

का गलत उपयोग करके उस पर बीमा पॉलिसी ली गई।
फिर उसे मृत दिखाकर क्लेम करने की तैयारी थी।

लेकिन साजिश विफल होने के बाद अंशुल को पुलिस द्वारा संपर्क किया गया—
वह जीवित था और किसी घटना से अनजान।


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🧪 Dummy Body — कैसे तैयार किया गया था?

पुलिस जांच के अनुसार:

🟢 डमी को मानव जैसा दिखाने के लिए कपड़ों, स्पंज और रबर से भरा गया
🔵 बाहरी लेयर को मेडिकल कपड़े में लपेटा गया
🟡 कफन से ढककर वास्तविक शव जैसा दृश्य बनाया गया
🔴 वजन बढ़ाने के लिए पैर और धड़ में अतिरिक्त सामग्री जोड़ी गई

यह सभी योजनाबद्ध तरीके से किया गया था।


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👮 पुलिस की कार्रवाई — गिरफ्तारियां और नेटवर्क की जांच

पुलिस ने:
🔵 कमल सोमानी गिरफ्तार
🔴 आशीष खुराना गिरफ्तार
🟡 दो साथी फरार
🟢 फर्जी दस्तावेज़, डिजिटल रिकॉर्ड बरामद

पुलिस का मानना है कि यह सिर्फ एक स्थानीय ठगी नहीं, बल्कि

🔴 बड़ा बीमा फ्रॉड नेटवर्क

भी हो सकता है, जिसकी जाँच शुरू हो चुकी है।


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📈 क्यों पाकिस्तान/भारत में Fake Death Frauds बढ़ रहे हैं?

 

🔵 आर्थिक दबाव और कर्ज
🔴 डिजिटल दस्तावेजों की चोरी आसान
🟡 श्मशान में पहचान सत्यापन की कमी
🟢 बीमा कंपनियों की कमजोर मृत्यु-जांच

यह अपराध इन सभी loopholes का नतीजा है।


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❓ TOP FAQ

 

🔵 1. इस फ्रॉड का मास्टरमाइंड कौन था?

कमल सोमानी — दिल्ली निवासी, भारी कर्ज में डूबा हुआ।

🔴 2. असली पीड़ित (Victim) कौन था?

अंशुल कुमार — प्रयागराज निवासी, जिसकी पहचान चोरी हुई।

🟡 3. बीमा राशि कितनी थी?

₹50 लाख।

🟢 4. नकली शव कैसे पकड़ा गया?

कफन हटाने पर प्लास्टिक का पुतला मिला।

🔵 5. कितने आरोपी शामिल थे?

चार — दो गिरफ्तार, दो फरार।

🔴 6. क्या मृतक वास्तव में जीवित है?

हाँ, अंशुल सुरक्षित और स्वस्थ मिला।

🟢 7. पुलिस ने क्या बरामद किया?

नकली मेडिकल पेपर, बीमा दस्तावेज़, डिजिटल चैट्स।

🟡 8. कौन-कौन से अपराध दर्ज हुए?

धोखाधड़ी, जालसाजी, पहचान चोरी, आपराधिक साजिश।

🔵 9. क्या यह बड़े रैकेट का हिस्सा है?

प्रारंभिक जांच में गहरी साजिश की संभावना।

🔴 10. क्या इससे बीमा सिस्टम पर असर पड़ेगा?

हाँ—बीमा कंपनियाँ क्लेम सत्यापन सख्त कर सकती हैं।

DISCLAIMER

“The Global Vission News केवल सूचना और रिपोर्टिंग उद्देश्य से सामग्री प्रकाशित करता है। उपयोग की गई सभी तस्वीरें प्रतिनिधि (representational) होती हैं और किसी वास्तविक घटना या व्यक्ति को प्रदर्शित नहीं करतीं। प्रकाशित जानकारी प्रारंभिक स्रोतों पर आधारित है तथा आगे चलकर अपडेट हो सकती है।”