Image: The Global Vission Illustration
Published By - The Global Vission News Desk
Date : 25 Dec 2025
ओडिशा में बड़ी एंटी-नक्सल सफलता: 1.1 करोड़ के इनामी गणेश उइके समेत छह नक्सली ढेर, सुरक्षा बलों ने कमांड स्ट्रक्चर पर दिया निर्णायक प्रहार
ओडिशा के कंधमाल जिले में सुरक्षा बलों ने वर्ष 2025 के अंतिम चरण में नक्सलवाद पर एक बड़ा प्रहार किया है। 25 दिसंबर को विशेष अभियान के तहत माओवादी संगठन के वरिष्ठ कमांडर और केंद्रीय समिति सदस्य गणेश उइके को एनकाउंटर में मार गिराया गया। इस कार्रवाई के दौरान उसके साथ सक्रिय लगभग छह नक्सली मारे गए, जिनमें महिला सदस्य भी शामिल थीं। यह ऑपरेशन उन अभियानों में से एक माना जा रहा है जिसने नक्सली नेतृत्व और नेटवर्क को गहरा झटका दिया है।
नक्सल गतिविधियों का गढ़ और गणेश उइके की भूमिका
कई वर्षों से कंधमाल–गंजम बॉर्डर स्थित घने जंगल नक्सली गतिविधियों का केंद्र रहे हैं। इस इलाके की भौगोलिक संरचना, जंगलों की गहराई और सीमित पहुंच नक्सलियों को छिपने और पुनर्गठन में मदद देती थी। इसी क्षेत्र में गणेश उइके लंबे समय से संगठनात्मक और सामरिक भूमिका निभा रहा था।
उइके न केवल ओडिशा में माओवादी नेटवर्क का संचालन कर रहा था, बल्कि मध्य भारत के कई जिलों में कैडर-भर्ती, प्रशिक्षण और हथियारों की सप्लाई जैसी गतिविधियों में भी उसकी रणनीतिक भूमिका बताई जाती थी।
सुरक्षा एजेंसियों की नजर में वह लगातार एक उच्च रैंकिंग लक्षित कमांडर था, जिस पर लगभग 1.1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। यह राशि भारत में सक्रिय माओवादी कमांडरों में सबसे अधिक मानी जाने वाली रकमों में शामिल थी।
एनकाउंटर: कैसे शुरू हुआ ऑपरेशन?
कई सप्ताह की निगरानी और जमीनी इनपुट के बाद सुरक्षा बलों को उइके की मौजूदगी के संकेत मिले।
इसके पश्चात विशेष अभियान समूहों ने बहु-स्तरीय घेराबंदी की योजना बनाई।
ऑपरेशन में प्रशिक्षित बलों ने
जंगलों के अंदरूनी रास्तों पर पोज़िशन ली,
एंट्री-एक्सिट पॉइंट नियंत्रित किए,
और ड्रोन व ट्रैकिंग उपकरणों की मदद से गतिविधियों पर नजर रखी।
एनकाउंटर उस समय शुरू हुआ जब सुरक्षा बलों की एक टीम पर घात लगाकर हमला किया गया। हालांकि बल पहले से सतर्क थे और उन्होंने तेज़, नियंत्रित और रणनीतिक जवाबी कार्रवाई की। गोलीबारी कई घंटों तक चली और अंततः गणेश उइके सहित छह नक्सली ढेर कर दिए गए।
एनकाउंटर स्थल से आधुनिक हथियार, डेटोनेटर और संचार उपकरण भी मिले, जो संगठन की गतिविधियों के स्तर को दर्शाते हैं।
नक्सली नेटवर्क पर असर: क्यों यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है?
संगठनात्मक नेतृत्व को बड़ा नुकसान
उइके का सफाया नक्सली कमांड संरचना में एक बड़ी खाली जगह छोड़ता है, जिसे भरना आसान नहीं होगा।
प्रशिक्षण श्रृंखला में टूट
उसकी भूमिका कैडर तैयार करने में अहम थी — उसके हटने से भर्ती और प्रशिक्षण प्रक्रिया प्रभावित होगी।
मनोवैज्ञानिक प्रभाव
बड़े इनामी कमांडर के ढेर होने से संगठन के भीतर नैतिक हौसले में गिरावट होती है और कई क्षेत्रों में कैडर का मनोबल कमजोर पड़ता है।
विकास और सुरक्षा कार्यों के लिए रास्ता साफ
ऐसे अभियानों के बाद सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी जैसे विकास कार्यों में बढ़ोतरी होती है, क्योंकि खतरे का स्तर घटता है।
क्या गणेश उइके झीरम घाटी नरसंहार से जुड़ा था?
2013 में हुए झीरम घाटी नरसंहार को देश की सबसे बड़ी नक्सली घटनाओं में से एक माना जाता है।
हालांकि सीधे आधिकारिक या न्यायिक स्तर पर उइके को उस हमले का मास्टरमाइंड घोषित नहीं किया गया है, लेकिन सुरक्षा विश्लेषणों और संगठनात्मक मैपिंग में उसका नाम उस नेटवर्क के रणनीतिक कमांड ढांचे से जोड़ा जाता रहा है।
इसलिए इस कार्रवाई को अप्रत्यक्ष रूप से उस हिंसक इतिहास के नेटवर्क पर प्रहार माना जा सकता है, जिसने मध्य भारत में अलग-अलग समय पर दर्जनों बड़ी घटनाओं को जन्म दिया।
स्थानीय प्रभाव: जंगल खान क्षेत्र में गतिविधियों पर नियंत्रण
कंधमाल-गंजम-बौद्ध क्षेत्र का घना जंगल लंबे समय से नक्सलियों के लिए सुरक्षित ज़ोन माना जाता था।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने:
सर्च ऑपरेशन तेज किए,
विकास परियोजनाओं का प्रसार बढ़ाया,
और स्थानीय समुदायों को सुरक्षा कवच प्रदान किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सल विरोधी अभियान तभी सफल होता है जब सुरक्षा और विकास साथ-साथ चलें।
उइके के मारे जाने से इस दिशा में एक निर्णायक मोड़ देखा जा रहा है।
भविष्य की रणनीति: क्या कदम अपेक्षित हैं?
संगठन के नए नेतृत्व की पहचान
सरेंडर को बढ़ावा देना
समाज में पुनर्वास कार्यक्रमों का विस्तार
संवेदनशील इलाकों में सतत निगरानी और तकनीकी तैनाती
सुरक्षा एजेंसियों की मंशा यह है कि बड़ी सफलताओं के बाद ओवरकॉन्फिडेंस से बचते हुए रणनीति को स्थिर रखा जाए, ताकि नक्सल नेटवर्क दोबारा संगठित न हो सके।
निष्कर्ष: निर्णायक संदेश
इस एनकाउंटर ने स्पष्ट किया है कि
“संगठित, लक्षित और जानकारी आधारित रणनीति” नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी है।
गणेश उइके जैसे बड़े कमांडर का ढेर होना
सिर्फ एक मुठभेड़ नहीं — बल्कि संगठन के शीर्ष ढांचे पर प्रहार के रूप में देखा जा रहा है।
यदि विकास परियोजनाओं, सामुदायिक विश्वास और सुरक्षा की निरंतरता जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में इस पूरे इलाके में स्थिरता, निवेश और शांति के नए अवसर पैदा होंगे।
FAQs — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1: गणेश उइके कितना बड़ा नक्सली कमांडर था?
वह केंद्रीय समिति का सदस्य था और उस पर लगभग 1.1 करोड़ रुपये का इनाम था — इसे उच्च स्तर के कमांडरों में गिना जाता था।
Q2: एनकाउंटर कहाँ और कैसे हुआ?
यह मुठभेड़ कंधमाल जिले के घने जंगलों में खुफिया इनपुट पर आधारित संयुक्त ऑपरेशन के दौरान हुई।
Q3: क्या संगठन को इससे बड़ा नुकसान हुआ है?
हाँ, क्योंकि उइके प्रशिक्षण, भर्ती और रणनीतिक दिशा — तीनों में सक्रिय भूमिका निभाता था।
Q4: क्या नक्सलवाद खत्म हो सकता है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि सुरक्षा + विकास + पुनर्वास — तीनों साथ चलें तो नक्सलवाद को कमजोर किया जा सकता है।
Disclaimer:
इस लेख में दी गई जानकारी विश्वसनीय सरकारी व मीडिया स्रोतों पर आधारित है। घटना से जुड़ी विवरण समय-समय पर बदल सकते हैं। हमारा उद्देश्य केवल तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराना है। किसी भी तरह की पुष्टि के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन या संबंधित विभाग के अपडेट को प्राथमिकता दें।
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Date : 25 Dec 2025
ओडिशा में बड़ी एंटी-नक्सल सफलता: 1.1 करोड़ के इनामी गणेश उइके समेत छह नक्सली ढेर, सुरक्षा बलों ने कमांड स्ट्रक्चर पर दिया निर्णायक प्रहार
ओडिशा के कंधमाल जिले में सुरक्षा बलों ने वर्ष 2025 के अंतिम चरण में नक्सलवाद पर एक बड़ा प्रहार किया है। 25 दिसंबर को विशेष अभियान के तहत माओवादी संगठन के वरिष्ठ कमांडर और केंद्रीय समिति सदस्य गणेश उइके को एनकाउंटर में मार गिराया गया। इस कार्रवाई के दौरान उसके साथ सक्रिय लगभग छह नक्सली मारे गए, जिनमें महिला सदस्य भी शामिल थीं। यह ऑपरेशन उन अभियानों में से एक माना जा रहा है जिसने नक्सली नेतृत्व और नेटवर्क को गहरा झटका दिया है।
नक्सल गतिविधियों का गढ़ और गणेश उइके की भूमिका
कई वर्षों से कंधमाल–गंजम बॉर्डर स्थित घने जंगल नक्सली गतिविधियों का केंद्र रहे हैं। इस इलाके की भौगोलिक संरचना, जंगलों की गहराई और सीमित पहुंच नक्सलियों को छिपने और पुनर्गठन में मदद देती थी। इसी क्षेत्र में गणेश उइके लंबे समय से संगठनात्मक और सामरिक भूमिका निभा रहा था।
उइके न केवल ओडिशा में माओवादी नेटवर्क का संचालन कर रहा था, बल्कि मध्य भारत के कई जिलों में कैडर-भर्ती, प्रशिक्षण और हथियारों की सप्लाई जैसी गतिविधियों में भी उसकी रणनीतिक भूमिका बताई जाती थी।
सुरक्षा एजेंसियों की नजर में वह लगातार एक उच्च रैंकिंग लक्षित कमांडर था, जिस पर लगभग 1.1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। यह राशि भारत में सक्रिय माओवादी कमांडरों में सबसे अधिक मानी जाने वाली रकमों में शामिल थी।
एनकाउंटर: कैसे शुरू हुआ ऑपरेशन?
कई सप्ताह की निगरानी और जमीनी इनपुट के बाद सुरक्षा बलों को उइके की मौजूदगी के संकेत मिले।
इसके पश्चात विशेष अभियान समूहों ने बहु-स्तरीय घेराबंदी की योजना बनाई।
ऑपरेशन में प्रशिक्षित बलों ने
जंगलों के अंदरूनी रास्तों पर पोज़िशन ली,
एंट्री-एक्सिट पॉइंट नियंत्रित किए,
और ड्रोन व ट्रैकिंग उपकरणों की मदद से गतिविधियों पर नजर रखी।
एनकाउंटर उस समय शुरू हुआ जब सुरक्षा बलों की एक टीम पर घात लगाकर हमला किया गया। हालांकि बल पहले से सतर्क थे और उन्होंने तेज़, नियंत्रित और रणनीतिक जवाबी कार्रवाई की। गोलीबारी कई घंटों तक चली और अंततः गणेश उइके सहित छह नक्सली ढेर कर दिए गए।
एनकाउंटर स्थल से आधुनिक हथियार, डेटोनेटर और संचार उपकरण भी मिले, जो संगठन की गतिविधियों के स्तर को दर्शाते हैं।
नक्सली नेटवर्क पर असर: क्यों यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है?
संगठनात्मक नेतृत्व को बड़ा नुकसान
उइके का सफाया नक्सली कमांड संरचना में एक बड़ी खाली जगह छोड़ता है, जिसे भरना आसान नहीं होगा।
प्रशिक्षण श्रृंखला में टूट
उसकी भूमिका कैडर तैयार करने में अहम थी — उसके हटने से भर्ती और प्रशिक्षण प्रक्रिया प्रभावित होगी।
मनोवैज्ञानिक प्रभाव
बड़े इनामी कमांडर के ढेर होने से संगठन के भीतर नैतिक हौसले में गिरावट होती है और कई क्षेत्रों में कैडर का मनोबल कमजोर पड़ता है।
विकास और सुरक्षा कार्यों के लिए रास्ता साफ
ऐसे अभियानों के बाद सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी जैसे विकास कार्यों में बढ़ोतरी होती है, क्योंकि खतरे का स्तर घटता है।
क्या गणेश उइके झीरम घाटी नरसंहार से जुड़ा था?
2013 में हुए झीरम घाटी नरसंहार को देश की सबसे बड़ी नक्सली घटनाओं में से एक माना जाता है।
हालांकि सीधे आधिकारिक या न्यायिक स्तर पर उइके को उस हमले का मास्टरमाइंड घोषित नहीं किया गया है, लेकिन सुरक्षा विश्लेषणों और संगठनात्मक मैपिंग में उसका नाम उस नेटवर्क के रणनीतिक कमांड ढांचे से जोड़ा जाता रहा है।
इसलिए इस कार्रवाई को अप्रत्यक्ष रूप से उस हिंसक इतिहास के नेटवर्क पर प्रहार माना जा सकता है, जिसने मध्य भारत में अलग-अलग समय पर दर्जनों बड़ी घटनाओं को जन्म दिया।
स्थानीय प्रभाव: जंगल खान क्षेत्र में गतिविधियों पर नियंत्रण
कंधमाल-गंजम-बौद्ध क्षेत्र का घना जंगल लंबे समय से नक्सलियों के लिए सुरक्षित ज़ोन माना जाता था।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने:
सर्च ऑपरेशन तेज किए,
विकास परियोजनाओं का प्रसार बढ़ाया,
और स्थानीय समुदायों को सुरक्षा कवच प्रदान किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सल विरोधी अभियान तभी सफल होता है जब सुरक्षा और विकास साथ-साथ चलें।
उइके के मारे जाने से इस दिशा में एक निर्णायक मोड़ देखा जा रहा है।
भविष्य की रणनीति: क्या कदम अपेक्षित हैं?
संगठन के नए नेतृत्व की पहचान
सरेंडर को बढ़ावा देना
समाज में पुनर्वास कार्यक्रमों का विस्तार
संवेदनशील इलाकों में सतत निगरानी और तकनीकी तैनाती
सुरक्षा एजेंसियों की मंशा यह है कि बड़ी सफलताओं के बाद ओवरकॉन्फिडेंस से बचते हुए रणनीति को स्थिर रखा जाए, ताकि नक्सल नेटवर्क दोबारा संगठित न हो सके।
निष्कर्ष: निर्णायक संदेश
इस एनकाउंटर ने स्पष्ट किया है कि
“संगठित, लक्षित और जानकारी आधारित रणनीति” नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी है।
गणेश उइके जैसे बड़े कमांडर का ढेर होना
सिर्फ एक मुठभेड़ नहीं — बल्कि संगठन के शीर्ष ढांचे पर प्रहार के रूप में देखा जा रहा है।
यदि विकास परियोजनाओं, सामुदायिक विश्वास और सुरक्षा की निरंतरता जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में इस पूरे इलाके में स्थिरता, निवेश और शांति के नए अवसर पैदा होंगे।
FAQs — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1: गणेश उइके कितना बड़ा नक्सली कमांडर था?
वह केंद्रीय समिति का सदस्य था और उस पर लगभग 1.1 करोड़ रुपये का इनाम था — इसे उच्च स्तर के कमांडरों में गिना जाता था।
Q2: एनकाउंटर कहाँ और कैसे हुआ?
यह मुठभेड़ कंधमाल जिले के घने जंगलों में खुफिया इनपुट पर आधारित संयुक्त ऑपरेशन के दौरान हुई।
Q3: क्या संगठन को इससे बड़ा नुकसान हुआ है?
हाँ, क्योंकि उइके प्रशिक्षण, भर्ती और रणनीतिक दिशा — तीनों में सक्रिय भूमिका निभाता था।
Q4: क्या नक्सलवाद खत्म हो सकता है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि सुरक्षा + विकास + पुनर्वास — तीनों साथ चलें तो नक्सलवाद को कमजोर किया जा सकता है।
Disclaimer:
इस लेख में दी गई जानकारी विश्वसनीय सरकारी व मीडिया स्रोतों पर आधारित है। घटना से जुड़ी विवरण समय-समय पर बदल सकते हैं। हमारा उद्देश्य केवल तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराना है। किसी भी तरह की पुष्टि के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन या संबंधित विभाग के अपडेट को प्राथमिकता दें।