बैतूल साइबर फ्रॉड केस: ‘साइबर हकीकत’ से जुड़े ₹10 करोड़ ट्रांजैक्शन, 3 और आरोपी गिरफ्तार | 16 दिसंबर
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Published By - The Global Vission News Desk
🛑 बैतूल साइबर फ्रॉड केस: ‘साइबर हकीकत’ साइट के जरिए ₹10 करोड़ से अधिक का संदिग्ध ट्रांजैक्शन, 3 और आरोपी गिरफ्तार
Published Date: 16 दिसंबर 2025
Category: Local News | Crime | Cyber Crime
Location: बैतूल, मध्यप्रदेश
🔴 ताज़ा अपडेट (Confirmed by Police Sources)
मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़े डिजिटल फ्रॉड और संदिग्ध ऑनलाइन लेन-देन नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में ‘साइबर हकीकत’ नाम से जुड़ी एक वेबसाइट/डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ₹10 करोड़ से अधिक का बैंक ट्रांजैक्शन सामने आया है।
पुलिस कार्रवाई के तहत 16 दिसंबर को तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद इस मामले में अब तक कुल 9 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। मामले की जांच अभी जारी है।
🧾 क्या है पूरा मामला? (Police Version)
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों ने
फर्जी या संदिग्ध डिजिटल प्लेटफॉर्म
कई बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स)
अवैध या गलत तरीके से प्राप्त SIM कार्ड
का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन किए।
जांच में सामने आया है कि इन खातों के जरिए
➡️ पैसा पहले एक खाते में आता था
➡️ फिर कुछ ही मिनटों में कई खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था
इस तरीके से ट्रांजैक्शन को ट्रैक करना मुश्किल बनाया जाता था।
👮♂️ 16 दिसंबर को गिरफ्तार किए गए आरोपी
पुलिस के अनुसार, हालिया कार्रवाई में जिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, वे इस प्रकार हैं:
1️⃣ अश्विन धर्मवाल
पुलिस का आरोप है कि
एक फर्जी फर्म/पहचान के नाम पर
लगभग ₹10.12 करोड़ का ट्रांजैक्शन किया गया
2️⃣ प्रवीण जायसवाल
जांच में सामने आया कि
इस आरोपी ने 50 से अधिक बैंक खाते उपलब्ध कराए
जिनका इस्तेमाल संदिग्ध लेन-देन के लिए हुआ
3️⃣ पीयूष राठौड़
आरोप है कि
इस आरोपी ने SIM कार्ड और मोबाइल कनेक्टिविटी की व्यवस्था की
जिससे डिजिटल गतिविधियों को संचालित किया गया
⚠️ पुलिस ने साफ किया है कि ये सभी आरोप जांच के आधार पर लगाए गए हैं और मामला अदालत में विचाराधीन रहेगा।
📊 कुल कितना पैसा ट्रांसफर हुआ?
पुलिस रिकॉर्ड और शुरुआती जांच के अनुसार:
💰 ₹10 करोड़ से अधिक
📌 अलग-अलग बैंक खातों के जरिए
⏱️ कम समय में कई बार ट्रांसफर
यह ट्रांजैक्शन पैटर्न संदिग्ध और असामान्य पाया गया, जिसके बाद साइबर सेल ने कार्रवाई शुरू की।
🕵️♂️ पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
पुलिस ने बताया कि
इस केस में पहले ही कुछ आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके थे
पूछताछ के दौरान पूरे नेटवर्क की जानकारी सामने आई
इसके बाद 16 दिसंबर को यह बड़ी गिरफ्तारी की गई
अब तक: ✅ कुल 9 आरोपी पुलिस हिरासत में
❗ कुछ अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच चल रही है
⚠️ पुलिस की आम जनता को चेतावनी
बैतूल पुलिस और साइबर सेल ने जनता से अपील की है:
❌ अपना बैंक खाता किसी को न दें
❌ UPI, ATM, OTP साझा न करें
❌ SIM कार्ड कमीशन पर देना अपराध है
👉 पुलिस के अनुसार,
खाता या SIM देने वाला व्यक्ति भी कानूनन आरोपी माना जा सकता है, चाहे उसे पैसे कम मिले हों।
🧠 यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह केस दिखाता है कि
✔️ साइबर ठगी कैसे काम करती है
✔️ आम लोग कैसे अनजाने में फंस जाते हैं
✔️ डिजिटल ट्रांजैक्शन कितनी आसानी से ट्रैक हो सकते हैं
पुलिस का कहना है कि
👉 डिजिटल जागरूकता ही ऐसे अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा तरीका है
🔍 आगे क्या?
पुलिस:
बैंक रिकॉर्ड
डिजिटल लॉग्स
IP और मोबाइल डेटा
की गहराई से जांच कर रही है।
आने वाले दिनों में
👉 और गिरफ्तारियां संभव हैं।
📌 निष्कर्ष (Safe Conclusion)
बैतूल का यह साइबर क्राइम मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि ऑनलाइन लालच, फर्जी वेबसाइट और कमीशन के चक्कर में लोग बड़ी कानूनी मुसीबत में फंस सकते हैं। पुलिस की जांच जारी है और अंतिम फैसला अदालत द्वारा किया जाएगा।
🔐 Disclaimer
> यह खबर पुलिस और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। सभी आरोपी तब तक निर्दोष माने जाएंगे जब तक न्यायालय दोष सिद्ध न कर दे।
📌 स्रोत / References:
यह रिपोर्ट मीडिया में प्रकाशित जानकारी और पुलिस सूत्रों पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए राष्ट्रीय हिंदी समाचार पोर्टलों की रिपोर्ट्स देखी जा सकती हैं।
साइबर अपराध से जुड़ी जानकारी के लिए भारत सरकार का आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in उपयोगी है।