NEET और मेडिकल एडमिशन के नाम पर साइबर ठगी का खुलासा — लखनऊ पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया
भारत में NEET परीक्षा को लेकर लाखों छात्रों और परिवारों के बीच पहले से ही काफी तनाव रहता है। मेडिकल सीटों की सीमित संख्या और कड़ी प्रतियोगिता का फायदा उठाते हुए कई फर्जी कंसल्टेंसी और ठग सक्रिय रहते हैं। इसी तरह की एक बड़ी साइबर ठगी का पर्दाफाश लखनऊ साइबर क्राइम पुलिस ने किया है। पुलिस के अनुसार, यह समूह NEET पास करवाने और मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन दिलाने का झांसा देकर छात्रों और अभिभावकों को निशाना बनाता था।
पुलिस ने इस मामले में प्रेमशंकर विद्यार्थी उर्फ़ अभिनव शर्मा और संतोष कुमार नामक दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि शिकायतों और डिजिटल सबूतों की जांच के आधार पर यह कार्रवाई की गई। फिलहाल मामले की जांच आगे जारी है।
कैसे काम करता था यह कथित गिरोह? (पुलिस की जांच में सामने आया मॉडल)
जांच के अनुसार, यह समूह लोगों का भरोसा जीतने के लिए बेहद संगठित तरीके से काम करता था। पुलिस ने जिन बिंदुओं की पुष्टि की है, वे इस प्रकार हैं:
1. फर्जी वेबसाइट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म
पुलिस ने बताया है कि संदिग्धों ने एक ऐसी वेबसाइट बनाई थी जो देखने में किसी असली शिक्षा-परामर्श सेवा जैसी दिखती थी।
वेबसाइट पर NEET पास करवाने,
मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने,
और काउंसलिंग में “विशेष सहायता” देने
जैसी बातें लिखी थीं, जिससे पीड़ितों का भरोसा आसानी से जीत लिया जाता था।
2. सोशल मीडिया अकाउंट्स का उपयोग
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय था।
इन पेजों पर दावा किया जाता था कि वे छात्रों को एडमिशन दिला चुके हैं, और फर्जी रिव्यू/स्क्रीनशॉट भी लगाए जाते थे।
3. बैंक खातों का नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, कई बैंक खाते इस्तेमाल किए गए थे, जिनमें अभ्यर्थियों द्वारा भेजी गई रकम जमा होती थी।
जांच में यह भी पाया गया कि ये खाते अक्सर अलग-अलग पहचान वाले लोगों के नाम से खोले गए थे।
4. झूठे आश्वासन और फर्जी दावे
शिकायतकर्ताओं ने पुलिस को बताया कि उनसे कहा गया था —
वे NEET का पेपर “मैनेज” कर देंगे,
काउंसलिंग में सीट कन्फर्म करवा देंगे,
कुछ मेडिकल कॉलेजों में “डायरेक्ट एडमिशन” दिला देंगे।
पुलिस का कहना है कि ये सभी दावे पूरी तरह बेबुनियाद और धोखाधड़ी का हिस्सा थे।
गिरफ्तारी कैसे हुई? — पुलिस की कार्रवाई
लखनऊ साइबर क्राइम थाने में कई शिकायतें दर्ज हुईं, जिसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। जांच में कई डिजिटल संकेत मिले:
1. भुगतान लेन-देन से मिली पहली कड़ी
पुलिस ने बैंक लेन-देन को ट्रैक किया और पाया कि कई पीड़ितों द्वारा भेजी गई रकम समान खातों में जा रही है। इससे गिरफ्तारी तक पहुंचने का रास्ता बना।
2. वेबसाइट और IP ट्रेसिंग
संदिग्ध वेबसाइट की तकनीकी जांच में:
सर्वर डिटेल,
लॉगिन IP एड्रेस,
और मोबाइल नंबर
जैसी जानकारी मिली, जिससे पुलिस को आरोपियों तक पहुँचने में मदद मिली।
3. सोशल मीडिया से मिले डिजिटल सबूत
पुलिस ने इंस्टाग्राम व अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स को ट्रेस किया।
ईमेल एड्रेस
रिकवरी नंबर
चैट हिस्ट्री
और भुगतान के स्क्रीनशॉट
जैसे सबूत मिले, जो गिरोह की गतिविधियों से मेल खाते थे।
इन सबूतों के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया और उन्हें पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है।
पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया?
पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार निम्नलिखित चीज़ें जब्त की गईं:
कई मोबाइल फोन
लैपटॉप
फर्जी काउंसलिंग एवं एडमिशन से जुड़े दस्तावेज़
फर्जी पहचान पत्र
बैंक खातों के रिकॉर्ड
वेबसाइट एवं सोशल मीडिया का डिजिटल डेटा
ये सभी सामग्री कथित धोखाधड़ी से जुड़ी बताई जा रही है। जांच अभी जारी है।
शिकायतें क्या कहती हैं?
कई छात्रों और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि उनसे मेडिकल सीट दिलाने का आश्वासन दिया गया और इसी भरोसे में उन्होंने भुगतान किया।
पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई इन्हीं शिकायतों के आधार पर की गई है।
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