Why Europe Is Spending €500 Billion on Defence: Explained
Author Name : Anshika Singh
https://www.theglobalvission.com/
Publish Date- 31 जनवरी 2026
Why Europe Is Planning a €500 Billion Defence Push: Simple Explained
यूरोप आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ उसे पहली बार यह एहसास हुआ है कि शांति अपने आप बनी नहीं रहती। €500 बिलियन का डिफेंस प्लान सिर्फ हथियार खरीदने की कहानी नहीं है, बल्कि यह डर, अनुभव और बदलती वैश्विक राजनीति का नतीजा है।
आइए, इसे पॉइंट-वाइज़ और आसान भाषा में समझते हैं
खतरे की घंटी: युद्ध अब पड़ोस में है
यूक्रेन युद्ध ने यूरोप की नींद उड़ा दी।
सालों तक बाल्टिक देश (एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया) और पोलैंड रूस के खतरे की चेतावनी देते रहे
पश्चिमी यूरोप ने इसे ज़्यादा गंभीरता से नहीं लिया
फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले ने सब बदल दिया
यह सिर्फ एक युद्ध नहीं था, बल्कि यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था का टूटना था।
“खाली अलमारी” सच्चाई: हथियार ही नहीं बचे
जब यूरोप ने यूक्रेन को हथियार भेजने शुरू किए, तब एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई।
यूरोप की बड़ी समस्याएँ:
गोला-बारूद की भारी कमी
इतनी इंडस्ट्रियल कैपेसिटी नहीं कि लगातार युद्ध झेल सके
कागज़ों पर मौजूद टैंक असल में खराब हालत में
यह पैसा नए खिलौने खरीदने के लिए नहीं, बल्कि खाली हो चुके स्टॉक भरने के लिए है।
EU Defence Commissioner का साफ संदेश:
“यूरोप को दशकों नहीं, बल्कि कुछ ही सालों में युद्ध के लिए तैयार होना होगा।”
ट्रंप फैक्टर: क्या अमेरिका पर भरोसा अब जोखिम है?
75 सालों से यूरोप की सुरक्षा का आधार NATO और अमेरिका रहा है।
लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।
क्यों?
“America First” नीति
यूरोप से बार-बार कहा गया: “तुम अपनी सुरक्षा का खर्च नहीं उठाते”
भविष्य में अमेरिका का ध्यान एशिया (चीन) पर ज़्यादा हो सकता है
यूरोप समझ गया है कि अपनी सुरक्षा अब खुद बनानी होगी।
Strategic Autonomy का मतलब:
अगर अमेरिका साथ न दे
तो भी यूरोप अकेले कार्रवाई कर सके
उदाहरण:
पहले यूरोप किराए पर सुरक्षा ले रहा था, अब वह अपना घर बना रहा है।
“9 रेडियो” समस्या: सिस्टम ही आपस में नहीं जुड़ते
यूरोप सिर्फ कम खर्च नहीं करता, बल्कि गलत तरीके से खर्च करता है।
हकीकत:
एक NATO मिशन में कमांडर को 9 अलग-अलग रेडियो चाहिए थे
क्योंकि हर देश का सिस्टम अलग था
नुकसान:
अमेरिका: 1 टैंक मॉडल
यूरोप: 17 टैंक मॉडल
अलग-अलग सिस्टम = ज्यादा खर्च, कम ताकत
👉 नया नियम:
“EU पैसा देगा, लेकिन तभी जब देश मिलकर एक ही सिस्टम खरीदें”
इससे:
पैसा बचेगा
सिस्टम आपस में जुड़ेंगे
ताकत बढ़ेगी
“Military Schengen”: टैंक भी बिना पासपोर्ट चलें
इंसान बिना पासपोर्ट यूरोप घूम सकता है, लेकिन टैंक नहीं।
बड़ी रुकावटें:
पुल टैंकों का वजन नहीं झेल सकते
रेलवे पुराने हैं
कागज़ी कार्रवाई में हफ्ते लगते हैं
समाधान:
Military Schengen
मजबूत पुल
चौड़ी रेलवे
डिजिटल परमिट
ताकि:
सेना दिनों में पहुँचे, हफ्तों में नहीं
सिर्फ हथियार नहीं, रोज़गार भी
यह डिफेंस प्लान इकोनॉमी प्लान भी है।
दो रास्ते:
जल्दी खरीदो → अमेरिका / कोरिया से
यूरोप में बनाओ → Airbus, Rheinmetall, Leonardo
EU का झुकाव:
✔️ यूरोप में बनाओ
✔️ रिसर्च करो
✔️ नौकरियाँ पैदा करो
जैसे:
AI
Cyber Security
Space Technology
जैसे अमेरिका में इंटरनेट और GPS सेना से आए, वैसे ही यूरोप को उम्मीद है।
यूरोपीय एयर डिफेंस शील्ड: आसमान की सुरक्षा
यूक्रेन युद्ध ने दिखा दिया:
ड्रोन
मिसाइल
एयर अटैक
को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
योजना:
पूरे यूरोप पर एक multi-layer air defence system
Israel के Iron Dome जैसा, लेकिन बहुत बड़ा
इतना महंगा कि कोई देश अकेले नहीं बना सकता
इसलिए joint EU fund ज़रूरी है
सबसे बड़ा सवाल: पैसा आएगा कहाँ से?
€500 बिलियन बोलना आसान है, जुटाना मुश्किल।
दो विचार:
Defense Bonds (सभी मिलकर कर्ज लें)
खुद खर्च काटो (जर्मनी, नीदरलैंड का तर्क)
अब माहौल बदल रहा है:
“मंदी झेल सकते हैं, कब्ज़ा नहीं।”
Summary: €500 Billion क्यों?
| वजह | समस्या | समाधान |
|---|---|---|
| यूक्रेन युद्ध | हथियार खत्म | बड़े पैमाने पर उत्पादन |
| बिखरी सेना | 17 टैंक, अलग सिस्टम | मिलकर खरीद |
| धीमी तैनाती | कमजोर पुल | Military Schengen |
| टेक गैप | US/China आगे | AI, Cyber निवेश |
| अमेरिका निर्भरता | भरोसा कमजोर | खुद की ताकत |
निष्कर्ष: यूरोप का बड़ा फैसला
यह पैसा सिर्फ रक्षा नहीं, परिपक्वता का संकेत है।
दुनिया अब सुरक्षित नहीं
इतिहास की छुट्टी खत्म हो चुकी है
ताकत का होना शांति बनाए रखने के लिए ज़रूरी है
यूरोप युद्ध नहीं चाहता —
वह बस इतना मजबूत होना चाहता है कि कोई युद्ध थोप न सके।