संसद में हंगामा: कागज उछालने पर शिवराज सिंह चौहान ने जताया दुख

संसद में हंगामा: कागज उछालने पर शिवराज सिंह चौहान ने जताया दुख

 

Image: The Global Vission Illustration

Published By - The Global Vission News Desk

Date : 18 December 2025

Time : 08:05 PM 
 

संसद में व्यवधान पर शिवराज सिंह चौहान ने जताई नाराजगी, मर्यादा बनाए रखने की अपील

 

नई दिल्ली | संसद समाचार

 

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल के दिनों में देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था संसद में लगातार हो रहे व्यवधान पर गहरी नाराजगी जताई है। लोकसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्षी सदस्यों के विरोध और हंगामे के बीच उन्होंने संसद की गरिमा, लोकतांत्रिक परंपराओं और जनहित के प्रति जिम्मेदारियों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संसद महज राजनीतिक संघर्ष का मंच नहीं है, बल्कि देश के लोगों की आवाज और आकांक्षाओं का केंद्र है।

शिवराज सिंह चौहान ने साफ कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन उन्हें व्यक्त करने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है. संसदीय कार्यवाही को बार-बार बाधित करना न केवल संसदीय समय की बर्बादी है बल्कि जनता में भी गलत संदेश जाता है।

 

हंगामे के बीच पेश कर रहे हैं अपनी बात
 

लोकसभा की कार्यवाही के दौरान जब सदन में लगातार नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन के कारण माहौल तनावपूर्ण था, तब शिवराज सिंह चौहान ने अपनी बात रखने की कोशिश की. शोर-शराबे के बावजूद उन्होंने कहा कि हर सांसद देश की जनता का प्रतिनिधित्व करता है और उनकी जिम्मेदारी सिर्फ अपनी पार्टी के प्रति नहीं बल्कि पूरे देश के प्रति है.
 

उन्होंने कहा:
 

"लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन बातचीत का रास्ता छोड़ने से लोकतंत्र कमजोर होता है।"

उनका बयान ऐसे समय आया है जब संसद के दोनों सदनों में कई महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत मुद्दों पर चर्चा होनी है, लेकिन व्यवधान के कारण कार्यवाही बार-बार स्थगित हो रही है।
 

संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर

संसद को देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था बताते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यहां होने वाली बहस और फैसले लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं. ऐसे में संसद का माहौल शोर-शराबे और आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहना लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है. उन्होंने कहा कि संसद का उद्देश्य है:
 

जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा करना

सरकारी नीतियों पर सवाल उठाना और सुझाव देना

सर्वसम्मति और असहमति के बीच संतुलन बनाना

लगातार व्यवधान से न केवल विधायी कार्य प्रभावित होते हैं बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास भी कमजोर हो सकता है।

 

संसदीय समय की बर्बादी पर चिंता
 

केंद्रीय मंत्री ने विशेष रूप से संसदीय समय की बर्बादी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संसद का प्रत्येक मिनट जनता के पैसे से चलता है और इसका प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाना चाहिए। जब सदन बार-बार स्थगित होता है तो कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा अधूरी रह जाती है।
 

राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि:
 

संसद में बढ़ते व्यवधान लोकतांत्रिक विमर्श को नुकसान पहुंचाते हैं।
 

राजनीतिक टकराव नीतिगत बहस पर भारी पड़ता है
 

जनता के असली मुद्दे उपेक्षित हैं। एड

 

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि संसद में बहस जितनी मजबूत होगी, लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा.

 

सभी दलों से सहयोग की अपील
 

अपने बयान में शिवराज सिंह चौहान ने बिना किसी राजनीतिक दल का नाम लिए सभी दलों से संसद की गरिमा बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सिर्फ सत्ता पक्ष या विपक्ष से नहीं चलता, बल्कि दोनों की समान जिम्मेदारी होती है.
 

उन्होंने कहा:

"चर्चा और आम सहमति लोकतंत्र को मजबूत करती है, जबकि टकराव और व्यवधान इसे कमजोर करते हैं।"
 

उनकी अपील ऐसे समय में आई है जब संसद में कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

 

विपक्ष का रुख और उनके विरोध का तर्क
 

हालाँकि, विपक्षी दलों का तर्क है कि वे संसद में सार्वजनिक मुद्दों को उठाने के लिए मजबूर हैं क्योंकि सरकार उनकी चिंताओं को गंभीरता से नहीं लेती है। विपक्ष का कहना है कि:
 

कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए समय नहीं दिया जाता.

 

सरकार सवालों का जवाब देने से बचती है.
 

विरोध उनका आखिरी सहारा बन जाता है.rt

 

फिर भी, शिवराज सिंह चौहान जैसे वरिष्ठ नेता मानते हैं कि विरोध प्रदर्शन की भी संसदीय पद्धतियां और सीमाएं होती हैं.
 

संसद और जनता के बीच संदेश
 

शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि संसद में क्या होता है, देश की जनता देखती और समझती है. बार-बार व्यवधान से यह संदेश जाता है कि नेता समस्याओं को सुलझाने के बजाय आंतरिक झगड़ों में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि:


 

जनता अपने प्रतिनिधियों से समस्याओं पर चर्चा की अपेक्षा करती है।


 

रोजगार, महंगाई, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर बहस होगी.


 

संसद सिर्फ विरोध-प्रदर्शन का नहीं, समाधान का मंच बनेगी।


 

संसदीय परंपराओं का ऐतिहासिक संदर्भ

 

भारत की संसद अपनी लंबी लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए जानी जाती है। स्वतंत्रता के बाद से, संसद ने:
 

ऐतिहासिक बहस के गवाह बने
 

महत्वपूर्ण कानून पारित किया

 

सरकारों को जवाबदेह ठहराया

 

शिवराज सिंह चौहान ने परोक्ष रूप से संकेत दिया कि इन परंपराओं को कायम रखना सभी सांसदों की साझा जिम्मेदारी है.

 

राजनीतिक माहौल और आगे का रास्ता


 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद में बढ़ता व्यवधान भारतीय राजनीति में ध्रुवीकरण की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है। इस संदर्भ में:


 

संवाद की संस्कृति को मजबूत करने की जरूरत है.


 

सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विश्वास बहाली जरूरी है.


 

संसदीय समितियों और चर्चाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।


 

शिवराज सिंह चौहान के बयान को इसी दिशा में एक संतुलित और नपी-तुली अपील के तौर पर देखा जा रहा है.


 

निष्कर्ष


 

लोकसभा में व्यवधान पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की नाराजगी महज तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं बल्कि संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर गंभीर चेतावनी है. उनका संदेश साफ है- लोकतंत्र में विरोध जरूरी है, लेकिन उसकी भी अपनी सीमाएं होनी चाहिए।


 

संसद संवाद और चर्चा का मंच बनी रहेगी तो लोकतंत्र मजबूत होगा। लेकिन अगर व्यवधान जारी रहे...

और यदि रुकावट राजनीतिक कार्रवाई का प्राथमिक साधन बन जाती है, तो अंततः जनता को इसके परिणामों का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।


 

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या सभी राजनीतिक दल इस अपील को गंभीरता से लेते हैं या संसद में माहौल तनावपूर्ण रहता है।


 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)


 

Q1. क्या शिवराज सिंह चौहान ने संसद में दिया बयान?

जी हां, उन्होंने लोकसभा की कार्यवाही के दौरान संसद की मर्यादा को लेकर बात की।


 

Q2. क्या उन्होंने किसी विशेष पार्टी को दोषी ठहराया?

नहीं, उन्होंने किसी विशिष्ट पार्टी का नाम लिए बिना, सामान्य रूप से व्यवधानों और संसदीय आचरण पर टिप्पणी की।


 

Q3. बयान का मुख्य संदेश क्या था?

लोकतंत्र में संवाद, चर्चा और मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।


 

Q4. यह कथन किन स्रोतों पर आधारित है?

यह संसदीय कार्यवाही और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है।

 

अस्वीकरण
 

यह समाचार लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध संसदीय कार्यवाही, मीडिया रिपोर्टों और बयानों पर आधारित एक स्वतंत्र समाचार विश्लेषण है। यहां प्रस्तुत विचार संबंधित व्यक्ति द्वारा दिए गए बयानों का सारांश है। इस लेख का उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है। इसका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल, विचारधारा या व्यक्ति का समर्थन या विरोध करना नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे इस विषय पर आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय स्रोतों का संदर्भ लें।


 


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Comments (5)

  1. Ankit Sharma 2 days ago Reply
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