दिल्ली में प्रदूषण का कहर: BS-6 वाहनों की एंट्री, बिना PUC नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल
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Published By: The Global Vision News Desk
Date: 17 December 2025
Time : 07:15 PM (IST)
दिल्ली में प्रदूषण का कहर: BS-6 वाहनों की एंट्री अनिवार्य, पुराने वाहनों पर सख्त पाबंदी
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। राजधानी की हवा लगातार “गंभीर” और “अत्यंत खराब” श्रेणी में बनी हुई है, जिससे आम लोगों के स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों ने GRAP (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) के तहत सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। इन फैसलों का सीधा असर वाहनों, ईंधन बिक्री, निर्माण गतिविधियों और अंतरराज्यीय यातायात पर पड़ेगा।
सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में अगर सख्ती नहीं बरती गई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। इसलिए लोगों की सेहत को प्राथमिकता देते हुए कुछ असुविधाजनक लेकिन जरूरी फैसले लिए गए हैं।
केवल BS-6 वाहनों को मिलेगी दिल्ली में एंट्री
दिल्ली में अब सिर्फ BS-6 (भारत स्टेज-6) उत्सर्जन मानक वाले वाहन ही चल सकेंगे।
BS-2, BS-3 और BS-4 श्रेणी के वाहन—चाहे वे निजी हों या व्यावसायिक—फिलहाल दिल्ली में प्रवेश नहीं कर पाएंगे।
किन वाहनों पर सबसे ज्यादा असर?
बाहरी राज्यों से आने वाले पुराने निजी वाहन
माल ढोने वाले ट्रक और लोडिंग वाहन
कई अंतरराज्यीय बसें, जो अभी भी BS-4 डीजल इंजन पर चल रही हैं
दिल्ली की सीमाओं पर चेकिंग तेज कर दी गई है और मानकों पर खरे न उतरने वाले वाहनों को वापस भेजा जा रहा है या नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है।
अंतरराज्यीय बस सेवाओं पर असर
BS-6 नियम लागू होने के बाद कई अंतरराज्यीय बस सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
खासतौर पर वे बसें जो पुराने डीजल इंजन पर चल रही हैं, उन्हें दिल्ली में प्रवेश की अनुमति नहीं मिल रही है।
इसका असर:
यात्रियों की आवाजाही पर
बस ऑपरेटरों के संचालन पर
सीमावर्ती राज्यों से दिल्ली आने-जाने वाले दैनिक यात्रियों पर
सरकार का कहना है कि यह कदम अस्थायी है, लेकिन प्रदूषण कम होने तक इसे जारी रखा जाएगा।
PUC अनिवार्य, बिना PUC नहीं मिलेगा ईंधन
दिल्ली में अब प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) को लेकर भी सख्ती बढ़ा दी गई है।
नए नियम क्या कहते हैं?
हर वाहन के पास वैध PUC होना अनिवार्य
बिना PUC वाले वाहन को पेट्रोल या डीजल नहीं मिलेगा
पेट्रोल पंपों पर ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरों से जांच
दूसरे राज्यों का वैध PUC भी दिल्ली में मान्य होगा
इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सड़क पर चलने वाला हर वाहन तय उत्सर्जन सीमा के भीतर ही प्रदूषण फैला रहा हो।
निर्माण सामग्री की ढुलाई पर रोक
प्रदूषण के बड़े कारणों में से एक निर्माण कार्य और निर्माण सामग्री की ढुलाई भी है।
इसी को देखते हुए सरकार ने:
ट्रक, ट्रैक्टर और अन्य भारी वाहनों से
ईंट, रेत, सीमेंट और कंस्ट्रक्शन मटेरियल की ढुलाई
दिल्ली बॉर्डर और शहर के भीतर—दोनों जगहों पर
फिलहाल रोक लगा दी है।
इस फैसले से रियल एस्टेट और निर्माण से जुड़े कारोबार पर असर जरूर पड़ेगा, लेकिन सरकार का मानना है कि यह कदम हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए जरूरी है।
CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को राहत
सरकार ने साफ किया है कि:
CNG वाहन
इलेक्ट्रिक वाहन
इन प्रतिबंधों से पूरी तरह मुक्त रहेंगे।
केवल पेट्रोल और डीजल से चलने वाले गैर-BS-6 वाहन ही इन नियमों के दायरे में आएंगे।
सरकार लंबे समय से लोगों को साफ-सुथरे ईंधन और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
GRAP के तहत क्यों जरूरी हैं ये सख्त कदम?
GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान को तब लागू किया जाता है जब प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है।
इसका उद्देश्य:
हवा की गुणवत्ता को और खराब होने से रोकना
बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की सेहत की रक्षा करना
अस्पतालों पर बढ़ते दबाव को कम करना
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय पर सख्ती न की जाए, तो सांस, आंखों और हृदय से जुड़ी बीमारियों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है।
सरकार का बयान
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि
> “प्रदूषण को एक दिन में खत्म करना संभव नहीं है, लेकिन लोगों की सेहत को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। मजबूरी में कड़े फैसले लेने पड़े हैं।”
उन्होंने जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि थोड़ी-सी असुविधा से भविष्य में बड़ी राहत मिल सकती है।
आम लोगों के लिए क्या सलाह?
गैर-जरूरी यात्रा से बचें
सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें
कार-पूलिंग को अपनाएं
बच्चों और बुजुर्गों को सुबह-शाम बाहर निकलने से रोकें
मास्क का उपयोग करें
निष्कर्ष
दिल्ली में प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरण की समस्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य आपातकाल बनता जा रहा है।
BS-6 वाहनों की अनिवार्यता, PUC की सख्ती और निर्माण गतिविधियों पर रोक जैसे फैसले भले ही कठोर लगें, लेकिन मौजूदा हालात में ये जरूरी हैं।
अगर सरकार और जनता मिलकर इन नियमों का पालन करें, तो आने वाले समय में दिल्ली की हवा को फिर से सांस लेने लायक बनाया जा सकता है।
Disclaimer
यह लेख विभिन्न आधिकारिक बयानों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। नियमों में समय-समय पर बदलाव संभव है। नवीनतम अपडेट के लिए संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं को देखें।
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