कांग्रेस की ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ रैली: रामलीला मैदान में राहुल गांधी का शक्ति प्रदर्शन
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Published By - The Global Vission News Desk
कांग्रेस की ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ रैली: रामलीला मैदान में शक्ति प्रदर्शन, जानिए प्रमुख अपडेट्स
📅 दिनांक: 14 दिसंबर 2025
📍 स्थान: रामलीला मैदान, नई दिल्ली
रविवार को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में कांग्रेस पार्टी ने “वोट चोर, गद्दी छोड़” नाम से एक विशाल रैली का आयोजन किया। इस रैली का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर पार्टी की चिंताओं को जनता के सामने रखना था। ऐसे समय में जब चुनावी पारदर्शिता को लेकर देशभर में बहस तेज है, कांग्रेस ने इस मंच से सुधारों की मांग को पुरजोर तरीके से उठाया है।
रैली का मुख्य उद्देश्य क्या था?
कांग्रेस नेताओं ने मंच से स्पष्ट किया कि यह रैली किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और संस्थागत निष्पक्षता के समर्थन में है।
कांग्रेस द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दे:
- मतदाता सूची: कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग।
- पारदर्शिता: चुनावी प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी बनाने का आग्रह।
- संस्थागत स्वतंत्रता: लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करना।
- जन-जागरूकता: नागरिकों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति सजग करना।
राहुल गांधी और प्रमुख नेताओं के बयान
रैली में कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व मौजूद रहा और संविधान व लोकतंत्र की रक्षा पर जोर दिया गया।
राहुल गांधी: “वोट केवल एक बटन नहीं, बल्कि जनता की आवाज है। लोकतंत्र तभी मजबूत रहेगा जब चुनावी प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा कायम रहेगा।”
मल्लिकार्जुन खरगे (कांग्रेस अध्यक्ष): “विपक्ष का दायित्व सवाल पूछना है और सरकार व संस्थाओं का दायित्व उन सवालों का समाधान करना है।”
प्रियंका गांधी वाड्रा: उन्होंने युवाओं और महिलाओं से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
‘वोट चोर’ नारा—एक संतुलित दृष्टिकोण
रैली का शीर्षक राजनीतिक रूप से आक्रामक रहा, जिस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आईं:
- कांग्रेस का पक्ष: कांग्रेस के अनुसार यह नारा राजनीतिक विरोध का माध्यम है और चुनावी प्रक्रिया में कथित खामियों पर ध्यान आकर्षित करता है।
- सत्ताधारी दल (BJP) की प्रतिक्रिया: भाजपा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव हारने के बाद विपक्ष ऐसे सवाल उठाता है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उस पर बेबुनियाद आरोप लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करते हैं।
- चुनाव आयोग (ECI) का मानक रुख: चुनाव आयोग पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि भारत की चुनावी प्रक्रिया और EVM पूरी तरह सुरक्षित व छेड़छाड़-मुक्त हैं। यह व्यवस्था वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय मानी जाती है।
सुरक्षा व्यवस्था और माहौल
- दिल्ली पुलिस द्वारा कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।
- रैली पूरी तरह शांतिपूर्ण रही।
- बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे, लेकिन किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं है।
- ट्रैफिक डायवर्जन के कारण मध्य दिल्ली में कुछ समय यातायात धीमा रहा।
क्या इस रैली का कोई कानूनी असर होगा?
फिलहाल यह रैली राजनीतिक दबाव बनाने की कवायद है।
- यह कोई न्यायिक निर्णय नहीं है।
- अब तक किसी नई कानूनी प्रक्रिया की शुरुआत नहीं हुई है।
- राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आगामी चुनावों से पहले इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाकर माहौल बनाने की यह एक रणनीति है।
FAQ
Q1. ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ रैली का क्या मतलब है?
यह कांग्रेस द्वारा दिया गया एक राजनीतिक नारा है, जिसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ विरोध दर्ज कराना है।
Q2. क्या चुनाव आयोग ने कोई गड़बड़ी मानी है?
जी नहीं। चुनाव आयोग और सरकार ने मौजूदा प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष व पारदर्शी बताया है।
Q3. रैली में कौन-कौन शामिल हुआ?
राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।
Disclaimer
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और 14 दिसंबर 2025 को हुई राजनीतिक घटना की रिपोर्टिंग करता है। इसमें प्रयुक्त नारे (जैसे ‘वोट चोर’) संबंधित दलों के आधिकारिक बयान हैं। लेखक या वेबसाइट इन दावों की सत्यता की पुष्टि नहीं करते और न ही किसी विशेष राजनीतिक विचारधारा का समर्थन करते हैं। हमारा उद्देश्य खबर को निष्पक्ष व संतुलित रूप में प्रस्तुत करना है.